तीन शब्दो का समाज ,आवश्यकता – चाहत और सपने

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वर्त्तमान समय में हर व्यक्ति कही न कही कुछ न कुछ करना चाहता  है।  कोई अपने समाज के लिए, कोई अपने लिए , कोई अपने गाउ के लिए, तो  कोई अपने देश के लिय।  लेकिन जीवन सिर्फ आवश्यकता  , चाहत और सपनो में गुजर जाती है।  
समाज का बहोत बड़ा भाग है जो सिर्फ रोज कमाकर खाने के लिए जीता है। यानी सिर्फ अपने २ वक्त की रोटी के लिए जीता है।  सायद वो सिर्फ आवश्यकता नामक शब्द  को ही जानता है।  इस वर्ग के लिए चाहत और सपने जैसे शब्द शायद झूठे जैसे लगते है। ये लोग अपनी आवश्यकता को पूरा नहीं कर पाए है।  समाज में ऐसे भी लोग है जो प्यार , भावना , दुःख, सहयोग , झूठ , सच, इंसानियत, सच्चाई , जैसे शब्दों के आजु बाजू होते हुए भी इन सब से परे है।  पूरा समाज तीन हिस्सों में बटा हुआ है आवश्यकता चाहत और सपने वाला समाज।  
इंसानियत जीवन इन तीनो शब्दों के समूह में ख़त्म हो रहा है।  आयु तो घट  और बढ़ रही है लेकिन  इंसान का जीवन इन तीन शब्दों को जानने और इन को जीने में ख़त्म हो रही  है।  
लोग आपने आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्यार , सहयोग , भावना या सच और झूठ जैसे कितने ही शब्दों का उपयोग कर के आपने अपने आवश्यकता को पूरा कर रहे है।  जो शायद कोई गलत नहीं है।  हर कोई आपने आवश्यकता को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकता है।  चाहे वो जान कर हो या अनजान बनकर लेकिन आवश्यकता पूरी होनी चाहिए।  मानव् आवश्यकता को पूरा करने के लिए हर कोई कदम उठाने को तैयार है लेकिन आवश्यकता के साथ कोई कोम्प्रोमाईज़ नहीं करना चाहता है।  कुछ भी हो जाए चाहे इज्जत चली जाए , झूठ बोलना पड़े या किसी की भावना को दुःख हो या ठेश पहुंचे लेकिन आवश्यकता पूरी होनी चाहिए। ये एक वर्ग के लोग है जिसे सायद लोग लोअर क्लास या गरीब कहते है।   ये लोग आवश्यकता को पूरा करने के चक्कर में इतने व्यस्त होते है  की इस वर्ग को सहयोग भावना और प्यार जैसे शब्दों के अनुभव होते हुए भी अनजान होते है । आवश्यकता के लिए को अभी रोक कर अगर अगले शब्द को देखे तो समाज का दूसरा वर्ग अत है जो चाहत में जीता है। जो आवश्यकता पूरा कर लिए है।  अभी उसका जीवन अपने चाहत को पूरा करने के लिए काम कर रहे है।  ये समाज का वो वर्ग है जो अपने सभी चाहत को पूरा करने के पीछे चला है।   ये वर्ग आवश्यकता को अनुभव कर चूका होता है।  जयादातर इस वर्ग का व्यक्ति समाज सेवा प्रेम, भावना , सहयोग जैसे शब्दों को जानते है लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए दुसरो की आवशकता का धयान नहीं करते है।  चाहत को पूरी करते करते ये वर्ग खुद के सपने जीना भी चालू कर देता है।  इस समाज में बहोत कम लोग येसे मिलते है जो दुसरो की आवश्यकता पर काम करते है।  

समाज में सामने को जीने वाले लोग इतने ज्यादा है की हर कोई सपनो में जीना चाहता है।  चाहे आवश्यकता पूरी हो या ना हो लेकिन समपणे तो होते ही है।  लेकिन चाहत और आवश्यकता की रेखा सपनो में जीने नहीं देती।  

ऐसा आभाष होता है जैसे जीवन पूरा किसी की आवश्यकता पूरी करने में तो किसी की चाहता पूरी करने में और किसी की सपने पूरी करने में चली जाती है।  लेकिन इन शब्दों के आगे पीछे जीवन व्यापन करने के वावजूद इन शब्दों की गहराई तक पहुंचना मुश्किल जैसा है ।

विनंती :  अपने अनुभव को सांझा किया गया है।  अपने विचार रखिये किसी के विचार की निंदा मत करिये।  इस मानव काल में किसी भी व्यक्ति के सभी विचार एक जैसे हो येसा संभव नहीं है। 

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