काम करने को मन चाहिए धन से तो सिर्फ सामान मिलता है। एक मोबाइल और मदद करने का मन ने महामारी में हजारो को राहत।

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लाखों लोग अपने घर से बाहर हैं , लाखों लोग भूखे में रहे हैं ! ना ही ,मरीज़ो को दवा मिल रहा है ना ही नवजात बच्चों को पीने के लिए दूध ! एक ऐसी परिस्थिति जिसमे पूरा देश तड़प रहा है !
अपनी क्षमता के अनुसार इनकी मदद के लिए समाज के हर तबके के लोग आ रहे हैं ! कोई खाना खिला रहा है तो कोई दवा बाँट रहा है !

लेकिन झारखंड के अजय कुमार पटेल अपने घर बैठे हज़ारों लोगो की मदद कर चुके है ! लोकड़ाऊंन के शुरुआत में अजय अपने गांव में रहने वाले मजदूर वर्ग के लोगों के लिए सेनेटिज़ेर और भोजन सामग्री का व्यवस्था किये लेकिन अजय ने उनके बारे में भी सोचा जो अपने घर से हज़ारों किलोमीटर दूर बदहाली में रह रहे हैं !

दूर दराज के लोगो को मदद पहुँचाने के लिए अजय भिन्न ंगोस से बात कर उन्हें मदद पहुंचवाने की कोशिश करने लगे ! इस क्रम में अजय हर रोज सैकड़ों जरूरतमंदों से फ़ोन पर बात कर उन्हें वहां के स्थाई संस्था से संपर्क कराने लगे ! इनके प्रयास से जरूरतमंदों तक भोजन , दवा और अन्य जरूरी वस्तुए पहुँचने लगी ! अजय अभी भी हर रोज सैकड़ों लोगो से फ़ोन पे बात कर इस महामारी से लड़ने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं ! इनका यह प्रयास अद्वित्य है और हमे सीख देता है की घर बैठे हम अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाहन कर सकते हैं ! इनके प्रयास को लोगिकालय नमन करता है ! और अपने दर्शको से अपील करता है की घर में सुरक्षित रहकर अपने आसपास रहने वाले गरीब तबके को मदद पहुँचाने का का प्रयास करें !

गांव में लोगों को हाथधोना और मास्क के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया, जिससे अधिक से अधिक लोग जागरूक हुए और यह मुहिम आसपास के इलाकों में पहुंचा और उस क्षेत्र के युवा वर्ग आगे आ कर इस महमामारी में अपने लोगों को जागरूक किए.

दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों और परिवारों की मदद देश के विभिन्न राज्यों में मित्रों और संस्थानों से कॉर्डिनेट कर लोगों मदद करने की कोशिश रंग लाई और हजारों लोगों तक सहायता पहुंच पाई.,इसके अलावा जरूरतमदों को और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड मदद करने का प्रयास किया और लोगों को मदद भी मिली

महामारी के इस संकट में सभी दोस्तों, संस्थानों, वॉलंटियर,ग्रुप, सोशल एक्टविस्ट,लेखक, टीचर और मजदूर भाई जिनके सहयोग के बिना संभव नहीं था .

सोशल मीडिया आज के समय में लोग गलत इस्तेमाल करते हैं लेकिन अगर सोशल मीडिया नहीं होता तो शायद लोकड़ाऊंन का पालन करते हुए ,एक गांव में बैठा युवा इतनी लोगों को मदद नहीं पूरी कर पाता.

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