करोड़ो का राहत लाखो लोग फिर भी हजारों भुखमरी से मर रहे है?

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भारत और पूरा विश्व कोरोना के चपेट में है। भारत में मौत का आकड़ा भी हजार के पार हो चुका है और विश्व दो लाख से ऊपर जा चुका है। एक करोड़ के आजू बाजू संक्रमित का आंकड़ा पहुंच चुका है । 
हालत इतने खराब है कि लोग कुछ सोच समझ पा रहे है। देश की आर्थिक स्थिति खराब है। देश की जीडीपी नीचे जा रही है। 
इसी बीच सबसे ज्यादा हालत खराब है रोज कमाकर रोज खाने वाले लोगो की। भारत में 81% से ज्यादा लोग असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है और किसी भी प्रकार की नौकरी की गारंटी या अन्य प्रकार के सामाजिक आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए सक्षम नहीं है।  इसी बीच प्रवासी मजदूर के सर से छत चली गई हो येसा लग रहा है। सरकार हो सके उतने कदम उठा रही है लेकिन फिर भी कुछ खास नहीं हो रहा है। करोड़ का राहत पैकेज जारी किया जा चुका है। 
खरबो रुपए  का दान मिल रहा है,  खरबों ओर अरबों में सहयोग किया जा रहा है। 
इसी बीच कभी कभी पैसे की लालच में कुछ लोग राहत में आए हुए सामग्री या सहयोग  को अपने पास  रख लिया करते है। 
भारत जैसे विकासशील देश में और इस माहामारी से प्रवासी मजदूर और रोज कमाकर खाने वाले लोगो की हालत बहुत खराब है। देश में कितने ही कंपनी करोड़ो का चैरिटी कर रही है। अरबों रुपए चैरिटी के रूप में दे रही है लेकिन क्या ये पैसा और सहयोग सच में आखिरी व्यक्ति तक जा रहा है। 
क्या सभी सहयोग देश के हर उस व्यक्ति के पास जा रहा है जिसको जरूरत है। हजारों लोग भुखमरी का शीकार तो नहीं हो रहे है? 
सरकार तो अपने कदम उठा रही  है ओर कॉरपोरेट कम्पनी भी मदद कर रही है अगर ये पूरा सहयोग आखिर तक पूरे का पूरा मिल जाए तो सायद मजदूरों को थोड़ा ज्यादा राहत मिल जाता। 
कॉरपोरेट कम्पनी  अगर जिसको पैसे दे उसका मॉनिटरिंग सिर्फ जवाबदारी पूरी करने के लिए नहीं लेकिन अगर पर्सनल रूप से लेके काम करे तो ये महामारी में अधिक से अधिक लोगो तक मदद मिल सकती है। 
पनाह टाइम्स सभी कॉरपोरेट कंपनी को सहयोग राशि को और अधिक तरह से मॉनिटरिंग करने के लिए निवेदन करती है। आपके द्वारा दिए गए सहयोग कितना आखिर तक जा रहा है को जानकारी लेने का आपका अधिकार हो इस तरह की नई पॉलिसी आनी चाहिए।

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