हिमालय के सबसे उंचे शिखर सगरमाथा (Sagarmatha) में चीन कि नयी चाल दिनप्रतिदिन आक्रामक होते दिख रही है। जबकी सगरमाथा नेपाल कि भुमी का अभिन्न अंग है इसमेँ कोई दोमत नहीं है। किन्तु समय-समय पर चीन कि चील नजर हमेशा नेपाल के उंचे शिखर सगरमाथा पर बनी रहती है। चीन सरकार के प्रभुत्व वाले च्यानल CGTN के ट्विट के अनुसार सगरमाथा चीनका भु-भाग बताना विश्वव्यापी बहसका विषय बना हुआ है।

सगरमाथा कि  उंचाई नापने के बहाने चीन ने नया अभियान शुरुआत किया हुआ है या युँ कह सकते हैं नया पैंतरा खेला हुआ है। इस अभियान के अन्तिम चरण में पहुँच कर चीन ने CGTN च्यानल के माध्यम से सगरमाथा के कुछ दुर्लभ फोटो प्रकाशित किया हुए हैं। प्रकाशित फोटो वाले क्षेत्रको चीनका भु-भाग बताया हुआ है। इस वजह से भारत-नेपाल और चीन के नागरिकों में ट्विटर युद्ध कि शुरुआत हो चुकी है।

CGTN च्यानल के विवादित फोटोको ट्विटर युद्ध के विवाद को शान्त करने प्रकाशित फोटो ट्विटर से हटाया गया है। ईलेक्ट्रोनिक मीडिया, सामाजिक नेटवर्क संजाल द्वारा भारत और नेपाल ने इस पोस्टका तीब्र विरोध किया हुआ है। नेपाल के नागरिकों द्वारा विरोध होने पर भी नेपाल सरकार मौन बैठे हुए है!

सन् १९५० के दशक में चीन और नेपालबीच बीस क्षेत्र में सीमा विवाद उत्पन्न हुआ था। इस विवादको सुलझाने दोनों देश ने संयुक्त आयोग गठन किया हुआ था। सन् १९६१ में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री बीपी कोईराला और चीन के तत्कालीन सर्वोच्च नेता माओ के बीच विवाद समाधान करने के लिए एक सम्मेलन संपन्न हुआ था। अपितु नेपाल के प्रधानमन्त्री बीपी कोईराला ने चीन के प्रस्ताव को नकारते हुए न्युनतम सकारात्मक सीमाविवाद समाधान करने कि कोसिस कि थी किन्तु चीन अभी तक भी इस सीमा विवाद से संतुष्ट नही दिख रहा है। कभी-कभी सीमा पर बचकानी हरकतें करते हुये दिखता है।

सीमा विवाद समाधान के समय चीन के सर्वोच्च नेता माओ ने सगरमाथा को नेपाल चीन मैत्री के लिए इसे मैत्री शिखर नाम दिया हुआ था। बल्की नेपाल ने माओ के इस पहल का घोर विरोध करते हुए अस्विकार किया और आज भी इस उच्च शिखर को विश्वका सबसे उंचा शिखर सगरमाथा नाम से जाना जाता है। और यह शिखर पुर्णतः नेपाल के भुमी में है इस पर दोमत हो ही नहीं सकता। किन्तु चीन आज भी सगरमाथा को चिनियाँ भु- भाग बनाने के चाल से पिछे नहीं है।

चीन आज भी सगरमाथा कि उंचाई नापने कि प्रक्रिया में है। सन् १९७६ और २००८ में चीन ने इसी तरह से सगरमाथा कि  उंचाई नापने कि प्रक्रिया कि थी। चीन के कहने अनुसार सगरमाथा के सही उंचाई में प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है। चीन ने सगरमाथा कि सही  उंचाई ८ हजार ८ सौ ४४ मीटरबताया हुआ है। यह आंकलन गलत है। इससे यह साबित होता है कि चीन कि नियत ठिक नही है। बरहाल चीनके इस बात का नेपाल ने खण्डन भी किया। सगरमाथा से नीचे उतरते समय चीन से अच्छा नेपाल के रास्ते से है।

नेपाल हीसगरमाथापर्वतारोहण के लिए प्रथम और उपयुक्त विकल्प है। नेपाल ने इस मार्ग पर पुर्वाधार तैयारी पुरजोर पर कि हुई है। सगरमाथा पर्वतारोहण से नेपाल सरकार को ११ सौ डालर आय प्राप्त होता है। इसी में सरकार कि आर्थिक नीति भी टिकि हुई है। आज के समय में सारा विश्व कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जुझ रही है। लेकिन चीन है कि मानता नहीं विश्व महाशक्ती बनने कि चाह ने सारा विश्व अपने विरुद्ध खडा कर दिया। सगरमाथा में चील नजर रखे हुए है। सगरमाथा नेपाल का है। नेपाल ही सगरमाथा है।

चीन ने हाल ही में सगरमाथा बेस केम्प नजिक ही5G टावर निर्माण किया हुआ है। सगरमाथा कि औसतन उँचाई ८ हजार ८ सौ ४८ मीटर है । 5G टावर सगरमाथा के साढे ६ हजार मीटर उंचाई में निर्माण किया हुआ है। इस टावरका रेंज सीधा सगरमाथा के शिखर तक आसानी से पहुँच रहा है। इस उपकरण से भविष्य में पर्वतारोहण करने वाले पर्वतारोही, पर्यटन कि सुविधा सहित दुर्घटना में उद्द्गार करने आसानी होगी। किन्तु चिन्ता का विषय यह है भविष्य में चीन नेपाल कि जासुसी करने में भी अव्वल दर्जेका षड्यन्त्र कर सकता है। इस मोबाईल टावर द्वारा चीन अपने अधीन तिब्बत कि भी निगरानी और संचार सुचारु करने का नयाँ भौतिक पुर्वाधार निर्माण किया है।

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